सदियों से रक्त दे माटी को सींचा ,
जन , जन्मभूमि और धर्म की वेदी पर
मिटा ठाकुर !
मौत होती तो भी लड़ लेता , पर...अपनों की घृणा से
अब सहमा ठाकुर !
जिनके लिए सब कुछ खोया , क्यों उनकी ही नज़रों में बुरा ?
फ़िल्मों का ठाकुर !
कहानियों-क़िस्सों का ठाकुर !
कविताओं का ठाकुर !
जन , जन्मभूमि और धर्म की वेदी पर
मिटा ठाकुर !
मौत होती तो भी लड़ लेता , पर...अपनों की घृणा से
अब सहमा ठाकुर !
जिनके लिए सब कुछ खोया , क्यों उनकी ही नज़रों में बुरा ?
फ़िल्मों का ठाकुर !
कहानियों-क़िस्सों का ठाकुर !
कविताओं का ठाकुर !
जब दुबक बैठे थे घरों में सब तमाशबीन ,
तब पीढियां युद्धभूमि में बलिदान कर रहा था ठाकुर ,
आज बुद्धिजीवी पानी पी पीकर बरगलाते और कोसते
कि आखिर कौन है ये ठाकुर..?
कौन बताए उन्हें कि कफ़न केशरिया करके , मूंछों पर तांव देकर मौत को गले लगाने वाला जांबाज ही था ठाकुर ।।
तब पीढियां युद्धभूमि में बलिदान कर रहा था ठाकुर ,
आज बुद्धिजीवी पानी पी पीकर बरगलाते और कोसते
कि आखिर कौन है ये ठाकुर..?
कौन बताए उन्हें कि कफ़न केशरिया करके , मूंछों पर तांव देकर मौत को गले लगाने वाला जांबाज ही था ठाकुर ।।
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