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राणा पूंजा को भूलवश या राजनीतिक लालसा के लिए भील बता सदा से साथ रहते आए भोमट के रहवासियों की अखंडता व एकता भंग करते हुए जनजाति वोट बटोरने के राज्य सरकार व स्थानीय राजनीतिज्ञों के प्रारंभिक प्रयासों को न्यायिक विरोध द्वारा रोकने का उस समय के अखबारों
राणा पूंजा को भूलवश या राजनीतिक लालसा के लिए भील बता सदा से साथ रहते आए भोमट के रहवासियों की अखंडता व एकता भंग करते हुए जनजाति वोट बटोरने के राज्य सरकार व स्थानीय राजनीतिज्ञों के प्रारंभिक प्रयासों को न्यायिक विरोध द्वारा रोकने का उस समय के अखबारों
जिनमें मुख्यतः राजस्थान पत्रिका से प्राप्त हुए कुछ लेख।
यह खबरें 1997 के नवंबर माह की हैं जब राणा पूंजा जी की अनैतिक रूप से मूर्ति स्थापना का कार्यक्रम जोरों शोरों से चल रहा था। खबरें बताती हैं कि राणा पूंजा जी के प्रमाणित वंशज राणा मनोहर सिंह जी
यह खबरें 1997 के नवंबर माह की हैं जब राणा पूंजा जी की अनैतिक रूप से मूर्ति स्थापना का कार्यक्रम जोरों शोरों से चल रहा था। खबरें बताती हैं कि राणा पूंजा जी के प्रमाणित वंशज राणा मनोहर सिंह जी
, महाराणा महेंद्र सिंह जी मेवाड़, मेवाड़ क्षत्रिय महासभा व कई दिग्गज इतिहासकारों ने इसका पुरजोर विरोध किया व अपने विचार न्यायालय, राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर रखे। बताया गया कि एक सोचे समझे एजेंडा के पश्चात् पूंजा जी के वंशज की खातेदारी की मगरी पर जबरन भील
वेशभूषा में व राणा पूंजा जी को भील संबोधित कर भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति श्री के. आर. नारायणन द्वारा मूर्ति अनावरण का कार्यक्रम तय किया गया था।
उस समय राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भैरों सिंह जी शेखावत थे।
अंततः न्यायालय व सरकार ने इस वाद को स्वीकार किया
उस समय राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भैरों सिंह जी शेखावत थे।
अंततः न्यायालय व सरकार ने इस वाद को स्वीकार किया
व सभी प्रमाणों को देखते हुए व इस विषय को गंभीरता से लेते हुए; पद की गरिमा कायम रख यह कार्यक्रम एक भूल मान स्थगित किया।
कुछ समय पूर्ण रूप से शांत रहने के बाद यह मुद्दा आज फिर उठा है, पर प्रमाण आज और भी पुख्ता हैं।
हम आज़ाद देश के नागरिक हैं
कुछ समय पूर्ण रूप से शांत रहने के बाद यह मुद्दा आज फिर उठा है, पर प्रमाण आज और भी पुख्ता हैं।
हम आज़ाद देश के नागरिक हैं
और हमें सवाल करने का अधिकार है पर किसी मुद्दे की सम्पूर्ण जानकारी लिए बिना व उसकी गहनता समझे बिना भेड़ चाल चलना आने वाली पीढ़ियों को अंधकार व आग के हवाले करने समान है।
(कुछ लोगों का कहना पानरवा राजपरिवार आगे क्यों नहीं आ रहा पनारवा राजपरिवार उस समय से संघर्ष कर रहा जब सोशल मीडिया नहीं था, इतिहास तुष्टिकरण राजनीति को लेकर पनारवा राजपरिवार को मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है)
@PSPanarwa @KshatriyaItihas @Lost_History1 @ShaluKanwar07
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