Yādukula🪔
Yādukula🪔

@Game_Changer3

6 تغريدة 198 قراءة Mar 24, 2022
अहीरो ने यादव टाइटल लगाना 1910 के बाद शुरू किया उससे पहले इन्हे #अहीर ही कहा/लिखा जाता था।
कई पुस्तकों में अहीरों का वर्णन #शूद्र के रूप मिल जाएगा।
अहीर खुद को यदुवंश से जोड़ते हैं ताकि इनकी पहचान यदुवंशी राजपूत के तौर पे हो सके,जबकि अहीरों का यदुवंश से कोई लेना देना नहीं है।
किसी भी लेखक ने 1910 यानी "चरवाहा जातियों के सम्मेलन" अहीर महासभा के पहले अहिरो को कहीं भी यदुवंशी नहीं लिखा है।
ऐसे अनेक ग लेख मिल जाएंगे जिनमें अहीरों को शूद्र या पिछड़ी जाती लिखा मिल जाएगा, लेकिन #अहीर फिर भी #क्षत्रिय (राजपूतों) को उल्टा सीधा बोलते रहते हैं।
जगह जगह जादौन, भाटी, चूड़ास्मा और जाडेजा क्षत्रियों का वर्णन यदुवंशी राजपूतों के तौर पर मिल जाएगा, और इनकी रियासते और वंशावली भी मिल जाएगी आपको पीढ़ी दर पीढ़ी की।
शर्म आनी चाहिए दूसरे के बाप को अपना बाप बनाने वाले को,इंसान को अपनी जाति पर गर्व होना चाहिए।
अभीर(अहीरों) को इस वेद में पापी और लुटेरे समान बताया गया है !!
आगरा और राजस्थान के जटिया (जाटव) हरिजन यादव बनने लगे हैं।
उनका कहना है कि हम जाटव (यादव) है, क्युकी द की दुम घिसकर ट बन गया और वैदिक काल से ही चर्मकारिता का उद्योग हमसे संबंधित रहा है।
चन्द्रभूषण अहीर ने महिषासुर को भी यादव वंश का रहा बता दिया इस पुस्तक में !!
मतलब हद है यार किसी को तो छोड़ो, हर किसी को अहीर बनाने पर तुले हुए हो।

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