अंबेडकर पूरी जिंदगी में सदैव थर्ड डिग्री में पास हुए।
मैट्रिक परीक्षा में, डॉ। बाबासाहेब अम्बेडकर ने कुल 750 अंकों में से 282 अंक प्राप्त किए। (डॉ। धनंजय कीर द्वारा लिखित डॉ। बाबासाहेब अम्बेडकर की जीवनी)
मैट्रिक परीक्षा में, डॉ। बाबासाहेब अम्बेडकर ने कुल 750 अंकों में से 282 अंक प्राप्त किए। (डॉ। धनंजय कीर द्वारा लिखित डॉ। बाबासाहेब अम्बेडकर की जीवनी)
उस जमाने में अंबेडकर को गुजरात बढ़ोदरा के क्षत्रिय राजा सीयाजी गायकवाड़ ने स्कॉलरशिप दी।m.timesofindia.com
अंबेडकर ने नारियों को पढ़ने का अधिकार नहीं दिया!
अंबेडकर के समय ही 15 पढ़ी लिखी औरतों ने संविधान लिखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया!
feminisminindia.com
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अंबेडकर ने सदैव अंग्रेजों का साथ दिया भारत छोड़ो आंदोलन की जम कर खिलाफत की अंग्रेजो को पत्र लिखकर बोला कि आप और दिन तक देश में राज करिए उन्होंने जीवन भर हर जगह आजादी की लड़ाई का विरोध किया
thequint.com
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1946 के चुनाव में पूरे भारत भर में अंबेडकर की पार्टी की जमानत जप्त हुई थी।
ahmedabadmirror.indiatimes.com
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देश के सभी नेताओं का तत्कालीन पहनावा भारतीय पोशाक धोती -कुर्ता, पैजामा-कुर्ता, सदरी व टोपी,पगड़ी, साफा, आदि हुआ करता था।गांधी जी ने विदेशी पहनावा व वस्तुओं की होली जलवाई थी।
यद्यपि कि नेहरू, गाधीं व अन्य नेता विदेशी विश्वविद्यालय व विदेशों में रहे भी थे फिर भी स्वदेशी आंदोलन से जुड़े रहे।अंबेडकर की कोई भी तस्वीर भारतीय पहनावा में नही है।अंबेडकर अंग्रेजिएत का हिमायती था।
his father registered his name as Ambadawekar in school, meaning he comes from his native village 'Ambadawe' in Ratnagiri district. His Devrukhe Brahmin teacher, Krishnaji Keshav Ambedkar, changed his surname from 'Ambadawekar' to his own surname 'Ambedkar' in school records.
जरा सोचिए भारत कितना दुर्भाग्यशाली है! भारत की स्वतंत्रता का विरोध करने वाला व्यक्ति अब भारत रत्न है।
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