माता को रम्यकपर्दिनी भी कहा गया है। रम्य और कपर्द शब्दों की संधि से ये नाम बना है। ऐसा नहीं है कि माता बस दुष्टतम राक्षसों का विनाश ही करती हैं। बल्कि माता का सौंदर्य भी अलौकिक है। यहाँ पर माता की सुंदर जटाओं को धारण करने के कारण उन्हें रम्यकपर्दिनी कहा गया है।
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कपर्दी भगवान शिव का भी एक नाम है क्योंकि उनकी जटाएँ भी ब्रह्मांड-फेमस हैं। माता ने महिषासुर को मारने के लिए भद्रकाली रूप धरा था, तब उनका सोने के जैसा दमकता हुआ रूप था और जटाधारिणी थीं वो। उसे के कारण कपर्दिनी नाम है।
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साथ ही, एक और जगह शिव जी उन्हें अन्धकासुर को मारने के लिए महाघोरा माताओं का सृजन किया था जिसमें से एक कपर्दिनी रूप भी था। माता जटाजूट धारण करती हैं तो मनोरम, मनोहारी, रम्य और सुखकारी दिखती हैं। ठीक भी है एक तरह से।
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जो स्वयं ही प्रकृति हैं, जिनसे बाकी लोग सौंदर्य पाते हों, वो कितनी सुंदर होगी! जिसने उन फूलों को बनाया है जिसके रंग पर आप मोहित हो जाते हैं, जिसने उन जानवरों को बनाया है, तितलियों, मछलियों, पक्षियों को बनाया है, वो स्वयं कितनी सुंदर होगी।
वो रम्यकपर्दिनी होगी।
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वो रम्यकपर्दिनी होगी।
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